मानव का विकास (जीवन की उत्पत्ति)

नमस्कार दोस्तों आज हम इस लेख में मानव के विकास का अध्ययन करेंगे हम जानेंगे इस लेख में की मानव का विकास किस-किस चरणों से हुआ है और कैसे हुआ है जब हम सांप स्वच्छ अंधेरी रात में आसमान की ओर तारों को देखते हैं तो हम लोग एक तरह से बीते हुए समय की ओर देखते हैं तरकीय दूरियों को प्रकाश वर्षों यानी की लाइट ईयर में मापा गया है आज हम जिस वस्तु को तारों के रूप में देखते हैं उसके प्रकाश यात्रा लाखों वर्षों पूर्व शुरू हुई थी वह हमसे करोड़ अरब मील दूर है और हमारी आंखों तक पहुंच रहे हैं हालांकि हम अपने आसपास की चीजों को जब देखते हैं तो बे चीज हमें तुरंत दिख जाती हैं क्योंकि मैं वर्तमान काल की हैं इसी तरह से जब हम सितारों को देखते हैं तो हम स्पष्ट रूप से भूतकाल में तक झांक कर रहे होते हैं तो दोस्तों आज हम आपको मानव का विकास और जीवन की उत्पत्ति के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे

जीवन की उत्पत्ति

दोस्तों अब हम बात करते हैं जीवन की उत्पत्ति तो दोस्तों जीवन की उत्पत्ति को ब्रह्मांड के इतिहास में एक अनूठी आश्चर्य जनक घटना माना गया है ब्रह्मांड विशाल है सही मायने में कहा जाए तो पृथ्वी ही अपने आप में ब्रह्मांड के एक नमूना मात्र है ब्रह्मांड बहुत प्राचीन और विशाल लगभग 20000 करोड़ वर्ष पुराना है ब्रह्मांड में बहुत बहुत आकाशगंगाए हैं मांड में आकाशगंगाओं का एक बहुत बड़ा समूह है आकाशगंगाओं में गैसों के बादल और सितारे समाहित रहते हैं ब्रह्मांड के आकार को ध्यान में रखते हुए केवल पृथ्वी एक बिंदु एक नमूना मात्र है ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में हमने बिग बैंग नामक महा विस्फोट का सिद्धांत बताने का प्रयास किया है बिंग बैंक थ्योरी ही पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति का सही सिद्धांत माना गया है इस बिग बैंग थ्योरी के अनुसार बैंग बैंग नामक महा विस्फोट हुआ यह एक अनूठी कल्पना से परे महा विस्फोटक का भौतिक रूप है इसके फलस्वरूप ब्रह्मांड का विस्तार हुआ और तापमान में कमी आई कुछ समय बाद हाइड्रोजन एवं हीलियम वैसे बनी एक ऐसे गुरुत्वाकर्षण के करण ठंडी हुई और वर्तमान ब्रह्मांड की आकाशगंगाओं का गठन हुआ मिल्की वे नामक आकाशगंगा सौर मंडल में पृथ्वी के रचना 4.5 बिलियन वर्ष पूर्व मानी जाती है हमारी आकाशगंगा का नाम मिल्की वे जिसे हम हिंदी में दुग्ध मेखला कहते हैं प्रारंभिक अवस्था में पृथ्वी पर कोई भी वायुमंडल नहीं था जलवाष्प मेथेन कार्बन डाइऑक्साइड तथा अमोनिया आदि धरातल को ढकने वाले गलत पदार्थ से निर्मुक्त हुई सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों ने अपनी को ऑक्सीजन और हाइड्रोजन गैस में विखंडित यानी कि अलग कर दिया पृथ्वी के चारों ओर ओजोन परत का जमा हुआ जब यह ठंडा हुआ तो जलवाष्प बरसात के रूप में बरसी और गहरी स्थान पर के जिससे महासागरों की रचना हुई पृथ्वी की उत्पत्ति के लगभग 50 करोड़ वर्ष के बाद अर्थात लगभग 400 करोड़ वर्ष पहले जीवन प्रकट हुआ

पृथ्वी लगभग 4554 अब वर्ष पुरानी है और किसी भी जीवित चीज का पहला संकेत यूरो चेन युग में लगभग 3.5 अब वर्ष पुराना माना जाता है पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की भूमि में माइक्रोबॉयल मेट जीवाश्म पाए गए जो लगभग 3.48 अब वर्ष पुराने बात जाते हैं पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में कुछ जैविक जीवन के अवशेष भी देखे गए हैं जो लगभग 4.1 अब वर्ष पुराने हैं जीवन का एक प्रमाण 3.7 अब वर्ष पुराना बताया गया है और यह ग्रीन लेंस की मेट सेंटीमेंट्री चट्टानों में पाया गया था जिसे अब ग्रेफाइट के नाम से जाना जाता है नए जैव रसायन अध्ययनों से पता चला है कि जीवन की उत्पत्ति सरल और छोटी रासायनिक प्रतिक्रियाओं की श्रृंखला से हुई है जो जटिल प्रक्रिया में बदल गई और अन्य जीवन में प्रेरित हुई उनका दावा है कि जीवन की शुरुआत राना जैसे 100 प्रतिस्थापन अनु ऑन से हुई होगी क्योंकि उनका मानना है कि उच्च कार्य प्रणाली और ऊर्जावान रसायन विज्ञान को 100 प्रतिकृति नो में बदल दिया गया था इन प्रतिकृति अणुओं की उत्पत्ति लगभग 4.1 अरब बर्ष पुरानी है

मानव विकास के चरण

दोस्तों अब हम मानव के विकास के चरण की बात करेंगे हम सभी जानते हैं कि मानव जीवन का आरंभिक चरण पैसा नहीं था जैसा अब हम को दिखता है बरसों के विकास ने मनुष्यों को अधिक सक्षम और बुद्धिमान प्राणियों में विकसित किया है विलुप्त प्राइवेट कि वह प्रक्रिया जिससे मनुष्य सबसे पहले वर्तमान चरण में पैदा हुए मानव विकास के परिभाषा दें तो होमो सेपियंस सेपियंस हमारा वैज्ञानिक नाम है और ऐसा माना जाता है कि मानव स्वरूप सबसे पहले लगभग 315 लाख साल पहले अफ्रीका के क्षेत्र में चला और विकसित हुआ अफ्रीका से ही मानव की उत्पत्ति मानी जाती है एक जाने माने वैज्ञानिक डार्विन जिनका मानना था कि प्राइवेट हमारे पंचायत वानर थे और बी हमारे पहले पूर्वज हैं दुनिया भर में कई मानव वैज्ञानिक और जीव विज्ञानी मनुष्य की उत्पत्ति और विकास में विश्वास करते हैं फिर भी कई वैज्ञानिक सिद्धांत को पूरी तरह से खारिज करते हैं जीवाश्म यह दर्शाते हैं कि होमो सेपियंस प्राइवेट से हमारे वर्तमान स्वरूप में विकसित हुए हैं लेकिन यह मनुष्य के बंदरों से आने के सिद्धांत को साबित बिल्कुल नहीं करता है अब हम बात करते हैं जीव विज्ञानों और मानव विज्ञानों द्वारा चित्रित समय रेखा के अनुसार मानव विकास चरण इस विशेष क्रम में रखा हैं

  • 1– मियोसीन – प्रारंभिक वानर
  • 2– होमोनिड्स –प्रारंभिक विकास या गोरिल्ला और चिंपांजी में विभाजित
  • 3– प्लियोसीन –सबसे प्रारंभिक द्विपाद
  • 4– प्लेस्टोसिन – बे चरण जिनमे ऑस्ट्रेलियोपिथिकस के होमो सेपियंस सेपियंस के समक्ष मानव रूप में विकसित होने वाली वानर जैसी अर्थात बंदर जैसी अकीर्तियां शामिल हैं
  • प्लेष्टोसीन के पांच चरण है जो निम्न है
  • अस्तरेलियोपिथेकस
  • होमो हैबिलिश
  • होमो इरेक्ट्स
  • नियेंडरथल, होमो बोडोएंसिश
  • होमो सेपियंस सेपियंस

निष्कर्ष

मनुष्य की उत्पत्ति और विकास तथा मानव विकास के चरण हमें जीवन की उत्पत्ति के बारे में बहुत कुछ सीखते हैं और हम इस विशाल ग्रह पर जीवन के संकेत के रूप में सबसे पहले कहां खड़े थे और इस समय देखो हम कहां खड़े हैं पहले के समय में कोई भी यह जानने की जहमत अर्थात हिम्मत नहीं उठाता था या इसके बारे में उत्सुक नहीं था कि जीवन की शुरुआत कैसे हुई और आज के समय हर कोई यह जानने को बहुत उत्सुक है कि जीवन की शुरुआत कैसे और कब हुई विरासत स्टार्विन ने 18वीं शताब्दी में सिद्धांत पेश किया जिसमें कहा गया कि सभी जीवन की शुरुआत जीवन के सबसे छोटे जीवों से हुई चार्ल्स डार्विन ने मनुष्य की उत्पत्ति और विकास के बारे में विस्तार से अपने दादा के सिद्धांत को अगले स्तर पर ले गए और इसके अलावा उन्होंने मानव विकास के चरणों के साथ-साथ मानव के वंश की व्याख्या की जीवन की उत्पत्ति के बारे में सबसे निष्कर्ष सिद्धांत बिग बैंग थ्योरी का है जिसके द्वारा कहा गया है कि जीवन की उत्पत्ति बिग बैंग किस सिद्धांत से हुई ।


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